शोनाली और मनीष बे एरिया में रहते हैं तथा गीत, संगीत और सुरों के रंग इस संसार में भरते रहते हैं। मनीष हाइकु, लिमरिक से लेकर छंदों तक में अपनी ज़ोर आजमाइश करते हैं और वहीं शोनाली भी कविताओं में कोमल स्वरों को स्थान देती रहती हैं। यह सांस्कृतिक कलाकार दम्पति भी हमारे साथ हुड़दंग मचाने आ रहा है। द्वार ठीक साढ़े तीन बजे खुलेंगे, हमारे अपने लक्ष्मी नारायण मंदिर के सभागार में, चार मार्च २०१७ के दिन, आप भी आइयेगा हमारे साथ कविताओं का हुड़दंग मचाने।
First ever Hindi Hasya Kavi Sammelan of Sacramento region. We hope you can be there to have fun and listen to good poetry. This event is organized to support Sewa International.
Sunday, February 12, 2017
हुड़दंग २०१७ - शोनाली एवं मनीष श्रीवास्तव
शोनाली और मनीष बे एरिया में रहते हैं तथा गीत, संगीत और सुरों के रंग इस संसार में भरते रहते हैं। मनीष हाइकु, लिमरिक से लेकर छंदों तक में अपनी ज़ोर आजमाइश करते हैं और वहीं शोनाली भी कविताओं में कोमल स्वरों को स्थान देती रहती हैं। यह सांस्कृतिक कलाकार दम्पति भी हमारे साथ हुड़दंग मचाने आ रहा है। द्वार ठीक साढ़े तीन बजे खुलेंगे, हमारे अपने लक्ष्मी नारायण मंदिर के सभागार में, चार मार्च २०१७ के दिन, आप भी आइयेगा हमारे साथ कविताओं का हुड़दंग मचाने।
हुड़दंग २०१७ - प्रतिभा सक्सेना
हिंदी साहित्य की उद्भट विद्वान एवं सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ प्रतिभा सक्सेना फॉल्सम में रहती हैं। गद्य और पद्य दोनों में उन्होंने खूब लिखा है। उनके द्वारा रचित "उत्तर कथा" को हिंदी भाषा के एक कालजयी ग्रन्थ के रूप में देखा जाता है। उनकी उपस्तिथि इस वर्ष के हुल्लड़ को गरिमा प्रदान करेगी। द्वार ठीक साढ़े तीन बजे खुलेंगे, हमारे अपने लक्ष्मी नारायण मंदिर के सभागार में, चार मार्च २०१७ के दिन, आप भी आइयेगा हमारे साथ कविताओं का हुड़दंग मचाने।
Saturday, February 11, 2017
हुड़दंग २०१७ - निहित कौल
हुड़दंग २०१७ - नीलू गुप्ता
हुड़दंग २०१७ - अर्चना पांडा
पिछले दशक में जिन कवयित्रियों नें अपनी उपस्थिति को पूरी धमक के साथ मंच पर दर्ज कराया है उनमें अर्चना पांडा का नाम अग्रिम पंक्ति में आता है। अर्चना पंडा बे-एरिया में रहती हैं। अर्चना भारत से अभियांत्रिकी तथा प्रबंधन की शिक्षा ग्रहण कर १९९९ में अमेरिका आयीं हैं। कविता के साथ इनकी गहरी रूचि गायन , वादन, नृत्य, भाषा एवं साहित्य में भी है. भारत से अमेरिका आई प्रवासी नारी के मन की उथल पुथल को अर्चना नें अपनी कविताओं में एक सशक्त अभिव्यक्ति दी है। अर्चना की कविताएं आपको हंसयेंगी भी तथा अपने भीतर झांक कर देखने के लिए प्रेरित भी करेंगी। अर्चना भी हमारे साथ इस हुड़दंग में शामिल होंगी। द्वार ठीक साढ़े तीन बजे खुलेंगे, हमारे अपने लक्ष्मी नारायण मंदिर के सभागार में, चार मार्च २०१७ के दिन, आप भी आइयेगा हमारे साथ कविताओं का हुड़दंग मचाने।
हुड़दंग २०१७ - जय श्रीवास्तव
इस वर्ष के हुड़दंग में अपनी कविताओं से रंग भरेंगे, अल डोराडो हिल्स में रहने वाले जय श्रीवास्तव। उत्सव और उल्लास जय की प्रवृत्ति में हैं और अच्छी कविता की समझ उन्हें अपने पिता से विरासत में प्राप्त हुई है। सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने वाले जय को इस हुड़दंग में सुनकर आपका मन भी गार्डन गार्डन हो जाएगा। द्वार ठीक साढ़े तीन बजे खुलेंगे, हमारे अपने लक्ष्मी नारायण मंदिर के सभागार में, चार मार्च २०१७ के दिन, आप भी आइयेगा हमारे साथ कविताओं का हुड़दंग मचाने।
Friday, February 10, 2017
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